
International Desk: होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में ईरान के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) मोहम्मद जवाद होसैनी को तलब कर इस घटना पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजनयिक को बुलाकर भारतीय नागरिक की मौत और अन्य भारतीयों के घायल होने पर गंभीर चिंता जताई। हालांकि बैठक में क्या बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई से जुड़े ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहियाह’ नामक दो तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ।
11 भारतीय नागरिकों की हो चुकी मौत
स हमले में ‘मोम्बासा’ टैंकर पर सवार एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हुए। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इनमें चार की हालत गंभीर बताई गई है।बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान अब तक 11 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। पिछले महीने भी MT Settebello नामक टैंकर पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। लगातार बढ़ते हमलों के कारण क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
UAE ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
UAE के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई थी, जिसे बाद में नियंत्रित कर लिया गया। मंत्रालय ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है। UAE ने यह भी कहा कि वह अपने क्षेत्र, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हुआ हमला
यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए और राष्ट्रपति Donald Trump ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी फिर से लागू करने और जहाजों से सुरक्षा शुल्क लेने की बात कही। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और यूएई से जुड़े टैंकरों को निशाना बनाया।
भारत की हालात पर पैनी नजर
भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने अभी तक आगे की कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
