
नई दिल्लीः अग्रणी शराब विनिर्माता हेनकेन कंपनी की इकाई यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (यूबीएल) ने वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की अर्थव्यवस्था में 43,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। एम्सटर्डम स्थित सलाहकार फर्म स्टूवर्ड रेडक्वीन की सामाजिक अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में यूबीएल के इस योगदान में मूल्य शृंखला के दौरान चुकाए 30,600 करोड़ रुपए के कर भी शामिल हैं।
यह राशि राज्यों के कुल कर राजस्व का 1.3 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.1 प्रतिशत के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ताओं द्वारा बीयर पर खर्च किए गए हर 100 रुपये में से करीब 63 रुपए राज्य सरकारों के पास जाते हैं, जो सार्वजनिक सेवाओं एवं बुनियादी ढांचे के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में यूबीएल ने भारत के घरेलू आपूर्तिकर्ताओं से 6,900 करोड़ रुपए के सामान और सेवाएं खरीदीं। इसमें 700 करोड़ रुपए कृषि क्षेत्र यानी भारतीय किसानों से खरीद पर खर्च किए गए। रिपोर्ट कहती है कि रोजगार के मोर्चे पर यूबीएल के प्रत्यक्ष परिचालन से 9,368 नौकरियों को समर्थन मिला। इसमें 2,910 यूबीएल कर्मचारी, 400 अनुमानित नौकरियां अनुबंधित इकाइयों में और 6,058 संविदा कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा, मूल्य शृंखला में 2.86 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर भी सृजित हुए। रिपोर्ट दावा करती है कि कुल 43,000 करोड़ रुपए के योगदान में से 15,200 करोड़ रुपए का मूल्यवर्धन सीधे भारत में हुआ।
यूबीएल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी विवेक गुप्ता ने कहा, ”कंपनी की 6,900 करोड़ रुपए की खरीद का 93 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देश के भीतर से होता है, जिससे किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और स्थानीय विनिर्माण को समर्थन मिलता है।” यूबीएल देश की प्रमुख बीयर कंपनियों में शामिल है और किंगफिशर, कल्याणी ब्लैक, बुलेट और ताज महल जैसे ब्रांड बेचती है। इसके अलावा यह हेनकेन, एम्स्टल बीयर और सोल जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी बाजार में उपलब्ध कराती है।
