
नेशनल डेस्क: देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए राहत की एक बड़ी खबर है। सरकार ने देश के 80 से ज्यादा टोल प्लाजा को एक अक्तूबर से बंद करने का फैसला लिया है। दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक हालिया आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई टोल प्लाजा ऐसे हैं, जो अपनी पूंजीगत लागत पूरी होने के बाद भी 60 किलोमीटर के भीतर अवैध तरीके से वसूली कर रहे हैं।
नियमों के मुताबिक, राजमार्ग परियोजना की पूंजीगत लागत वसूल होने के बाद टोल टैक्स में 60 फीसदी तक की कटौती होती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड और दक्षिण भारत के कई राज्यों में सक्रिय टोल ऑपरेटर बड़ी चालाकी से कार्य कर रहे हैं। इस कटौती से बचने के लिए ऑपरेटर लागत पूरी होने से ठीक पहले मंत्रालय को नया प्रस्ताव भेज देते थे। इसमें सेक्शन पर नया फ्लाईओवर, अंडरपास या कुछ किलोमीटर की अतिरिक्त सर्विस लेन बनाने की मांग की जाती थी। इस नए निर्माण के खर्च को पुरानी लागत में जोड़कर कागजों पर यह दिखा दिया जाता था कि कुल निवेश अभी पूरा नहीं हुआ है। इस हेरफेर के जरिए दशकों से जनता से पूरा 100 फीसदी टोल वसूला जा रहा था, जिसे मंत्रालय की ऑडिट टीम ने पकड़ लिया है।
अवैध सब-टोल भी निशाने पर
इतना ही नहीं, 60 किलोमीटर की न्यूनतम दूरी वाले नियम को ताक पर रखकर कई जगह पर ‘सब-टोल’ स्थापित किए गए हैं, जिसके जरिए अवैध वसूली की जा रही है। ऑडिट रिपोर्ट में इन्हें पूरी तरह अवैध पाया गया है और अब इन्हें तुरंत बंद करने की तैयारी है।
पहले चरण के तहत अक्टूबर 2026 तक उन 35 टोल प्लाजा को हटा दिया जाएगा, जिनका अनुबंध (Contract) खत्म हो चुका है।
वहीं दूसरे चरण में शेष बचे हुए अवैध टोल प्लाजा को हटाने के लिए सरकार ने 31 दिसंबर 2026 की अंतिम समय-सीमा तय की है।
