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माइनिंग को लेकर खैहरा का केजरीवाल पर निशाना, 20,000 करोड़ के वादे पर उठाए सवाल माइनिंग से 20,000 करोड़ का दावा, खैहरा बोले – बाकी पैसा कहां गया?


पंजाब की राजनीति में एक बार फिर खनन (माइनिंग) से होने वाली कमाई को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और विधायक Sukhpal Singh Khaira ने Arvind Kejriwal और उनकी पार्टी Aam Aadmi Party (AAP) पर बड़ा हमला बोला है। खैहरा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले पंजाब की जनता से माइनिंग से हर साल लगभग 20,000 करोड़ रुपये की आय का वादा किया था, लेकिन अब सरकार इस मामले में जवाब देने से बच रही है कि बाकी 19,800 करोड़ रुपये कहां गए

खैहरा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब में चुनाव लड़ा था, तब पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्य के नेताओं ने दावा किया था कि अगर पंजाब में उनकी सरकार बनती है तो अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी और सरकारी नियंत्रण में माइनिंग कराकर राज्य को लगभग 20,000 करोड़ रुपये सालाना की आय होगी।

उन्होंने कहा कि अब सरकार बनने के बाद वास्तविक आंकड़े सामने आ रहे हैं, जिनमें माइनिंग से होने वाली आय कुछ सौ करोड़ रुपये तक ही सीमित दिखाई दे रही है। खैहरा ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार ने खुद दावा किया था कि माइनिंग से 20,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, तो अब यह राशि क्यों नहीं दिखाई दे रही।

खैहरा ने यह भी कहा कि पंजाब में अवैध खनन का मुद्दा कई सालों से विवादों में रहा है और अलग-अलग सरकारें इसे रोकने का दावा करती रही हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाकर जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे। उनका कहना है कि अब सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि माइनिंग से वास्तविक आय कितनी हो रही है और चुनाव के दौरान किए गए दावों का क्या हुआ।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता के साथ आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार माइनिंग से होने वाली आय, जारी किए गए खनन ठेकों और सरकारी राजस्व का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखे।

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि सरकार ने अवैध खनन को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं और नई नीतियों के माध्यम से सिस्टम को पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना है कि पिछले समय में माइनिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां थीं, जिन्हें ठीक करने में समय लगेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में माइनिंग का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है और यह सरकारों के लिए बड़ी चुनौती भी रहा है। खनन से जुड़े राजस्व के दावे और वास्तविक आय के बीच अंतर को लेकर विपक्ष अक्सर सरकार को घेरता रहा है।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या जवाब देती है और क्या माइनिंग से जुड़े राजस्व के आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं या नहीं। फिलहाल खैहरा के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में एक नई बहस जरूर छिड़ गई है।

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