चंडीगढ़, 10 मार्च:
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी कांग्रेस पार्टी की “जागीरदारी और जातिवादी मानसिकता” को उजागर करती है।
आज पंजाब विधानसभा में सदन को संबोधित करते हुए बैंस ने कहा, “पिछले चार वर्षों से पंजाब के लोगों की मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने वाले पेशे से वकील, संगरूर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान , विपक्ष के पूर्व नेता और दलित भाई चारे से आने वाले पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को ‘बंधुआ मजदूर’ कहना केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे दलित समुदाय और वकील समुदाय का अपमान है। यह इस धरती के हर उस बेटे और बेटी का अपमान है, जो अमीर पृष्ठभूमि के बिना अपनी मेहनत और संघर्ष से गरीबी से उठकर आगे बढ़े हैं।”
कांग्रेस नेता और आम आदमी पार्टी के मंत्री के बीच वास्तविक अंतर पर प्रकाश डालते हुए स हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि इस टिप्पणी के पीछे वर्ग और जाति आधारित पूर्वाग्रह छिपा हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने यह बयान दिया है उसे संपत्ति विरासत में मिली है, जबकि हरपाल सिंह चीमा जैसे लोग संघर्ष के बल पर आगे आए हैं।
उन्होंने कहा कि जागीरदारी मानसिकता वाले लोगों को यह स्वीकार नहीं हो रहा कि एक दलित अब पंजाब के वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहा है और एक सामान्य पृष्ठभूमि से आया व्यक्ति सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने कांग्रेस नेताओं की मानसिकता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
हरजोत सिंह बैंस ने कांग्रेस नेता से सवाल करते हुए कहा, “आपको आखिर परेशानी किस बात से है? क्या इसलिए कि वे सादे कपड़े पहनते हैं? क्या इसलिए कि वे आपके जैसे महंगे सूट नहीं पहनते? या इसलिए कि वे अंग्रेज़ी नहीं बोलते? यह आपका सामंती अहंकार है कि केवल वही लोग सम्मान के पात्र हैं जो आपकी तरह कपड़े पहनते हैं, आपकी तरह बोलते हैं और आपके जैसे सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं।”
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चीमा ने हाल ही में अपना चौथा बजट पेश किया है और उनके नेतृत्व में पंजाब ने वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने हर घर तक मुफ्त बिजली पहुंचाने, हर परिवार को 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा गारंटी देने, योग्य विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने और सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
एक गांव के दौरे के दौरान का अनुभव साझा करते हुए बैंस ने कहा कि एक बुजुर्ग दलित महिला ने उनसे कहा कि उसने “राम राज” के बारे में केवल सुना था, लेकिन आज वह इसे अपनी आंखों से देख रही है, क्योंकि लोगों को मुफ्त बिजली और 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि धनी नेताओं की नफरत, अपमान और अहंकार के बावजूद राज्य के लोग खुश हैं और यही बात विपक्ष को सबसे अधिक परेशान कर रही है।
बैंस ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसी तरह की टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा कि एक आबकारी और कर अधिकारी, जिसने राजनीति में आने के लिए अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी थी, उसे “बैंड-बाजे वाला” कहकर अपमानित किया गया, क्योंकि उसके पिता विवाह समारोहों में बैंड बजाते थे।
उन्होंने सवाल किया कि क्या शादी-ब्याह में बैंड बजाना कोई अपराध है? अब वही लोग संघर्ष करके आगे आए एक दलित वकील को “बंधुआ मजदूर” कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं विपक्ष की संकीर्ण और सामंती सोच को उजागर करती हैं।
अंत में हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि जो लोग सामंती और उच्च जाति के अहंकार से प्रेरित होकर दूसरों का अपमान करते हैं, पंजाब की जनता ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
