आज लोकसभा में बोलते हुए, वड़िंग ने मांग की कि अपनी सजा पूरी कर चुके सभी बंदी सिखों को देश के कानून के अनुसार तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ बंदी सिख ही नहीं, बल्कि वे सभी कैदी जिनकी सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन फिर भी देश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं, उन्हें भी तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए, कहा कि जहां देश का संविधान और कानून किसी भी अपराध के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करते हैं, वहीं पर यह भी स्पष्ट करते हैं कि जो लोग अपनी सजा पूरी कर लेते हैं, उन्हें जेल से रिहा किया जाना चाहिए।
बाद में संसद भवन के बाहर पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान, वड़िंग ने खुलासा किया कि उनके पास विश्वसनीय जानकारी है कि बिट्टू और श्रीमती बादल नियमित रूप से केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर बंदी सिखों की रिहाई का विरोध कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दोनों सांसद अलग-अलग पार्टियों भाजपा और अकाली दल से संबंधित हैं, लेकिन लगता है कि वे चुनावों के दौरान इस मुद्दे को जिंदा रखकर इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से वह इस मामले पर जो रुख दिखाते हैं, वह इनके द्वारा निजी तौर पर की जा रही मांग से बिल्कुल अलग है।
