4 कर्मचारियों को किया काबू
दरअसल यहां पर प्राइवेट एजेंटों के माध्यम से मोटी रिश्वत लेकर फर्जी हैवी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे थे। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब एसआईएडीएस सेंटर महूआना द्वारा जारी किए गए 51 ड्राइविंग ट्रेनिंग सर्टीफिकेटों में से 23 जाली पाए गए। जब इस पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई तो एक बड़े और फर्जी भ्रष्टाचार रैकेट को बेनकाब किया है। इस केस में विजिलेंस ब्यूरो ने सात मुलजिमों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है, जिनमें से मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) समेत चार मुलजिमों को गिरफ़्तार कर लिया है।
इस तरह विजिलेंस को मिली कामयाबी
इस संबंधी जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि पठानकोट के रहने वाले एक व्यक्ति से मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने आरटीए, गुरदासपुर में डाटा एंट्री आपरेटर प्रतिभा शर्मा के विरुद्ध गहनता से जांच शुरू की थी। अब तक की जांच के आधार पर इस केस में विजिलेंस ब्यूरो के थाना अमृतसर रेंज में केस दर्ज किया गया।
इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने चार मुख्य मुलजिमों- गुरदासपुर के गांव मैदोवाल कलां का निवासी और एमवीआई और जीआई ड्राइविंग इंचार्ज एसआईएडीएस सेंटर सुखदेव सिंह, शैली डाक्यूमेंट सेंटर के अमित कुमार उर्फ शैली, पंजाब डाक्यूमेंट के जगप्रीत सिंह और राकेश कुमार, जोकि इस समय बटाला में तैनात है, को गिरफ्तार किया है। बाकी मुलजिमों कुलबीर डाक्यूमेंट सेंटर के कुलबीर सिंह, जीएमडी डाक्यूमेंट सेंटर के राकेश कुमार और आरटीए गुरदासपुर की प्रतिभा शर्मा को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है।
