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‘सांझ राहत केंद्र’ जरूरतमंद महिलाओं के लिए पंजाब पुलिस के सामुदायिक सहायता मॉडल के रूप में उभरे

 

  • पंजाब भर में ‘सांझ राहत केंद्र’ पीड़ित महिलाओं को परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास सेवाएं प्रदान कर रहे हैं
  • पंजाब पुलिस के सांझ राहत केंद्रों में 1000 से अधिक मामले दर्ज; चार जिलों तक हुआ विस्तार : डीजीपी गौरव यादव
  • पंजाब पुलिस सांझ राहत केंद्रों, जागृति कार्यक्रम और महिला सहायता डेस्क के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बना रही है : डीजीपी गौरव यादव
  • ‘सांझ’ प्रणाली ने लोगों और पुलिस के बीच विश्वासपूर्ण साझेदारी को मजबूत किया है, जबकि सांझ राहत केंद्र जरूरतमंद महिलाओं को सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं : गुरप्रीत कौर देओ, एसडीजीपी, कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन

चंडीगढ़/मोहाली, 6 अगस्त : महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए पंजाब पुलिस के ‘सांझ राहत केंद्र’ आज सामुदायिक पुलिसिंग के एक सशक्त मॉडल के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पीड़ित एवं जरूरतमंद महिलाओं को सहायता, परामर्श, संकट की स्थिति में त्वरित हस्तक्षेप तथा पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मोहाली स्थित सांझ राहत केंद्र में केवल दो प्रशिक्षित काउंसलरों के साथ शुरू की गई इस पहल का विस्तार अब फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और जालंधर के सिविल अस्पतालों तक हो चुका है। पिछले दो वर्षों के दौरान इन केंद्रों में 1,069 मामले दर्ज किए गए, जबकि 1,656 मामलों की प्रारंभिक जांच (स्क्रीनिंग) की गई।

इस संबंध में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “वर्तमान समय में एसएएस नगर, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब और जालंधर में चार सांझ राहत केंद्र संचालित हो रहे हैं, जो संकटग्रस्त महिलाओं को मानसिक आघात से उबरने और सामान्य जीवन जीने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। इस प्रकार की पहलें महिलाओं की सुरक्षा के प्रति पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, क्योंकि इनके माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर सक्रिय हस्तक्षेप सुनिश्चित कर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को रोका जा सकता है।”

पंजाब के डीजीपी ने बताया, “पिछले दो वर्षों के दौरान सांझ राहत केंद्रों ने पीड़ित महिलाओं को परामर्श, सहारा, कानूनी सहायता तथा पुलिस सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें राहत प्रदान की है। मोहाली का एक मामला इस पहल के प्रभाव को स्पष्ट करता है। एक महिला अपने पति द्वारा शारीरिक प्रताड़ना किए जाने और उसकी हत्या करवाने की धमकी दिए जाने के बाद सांझ राहत केंद्र पहुंची। एसएएस नगर स्थित केंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की, सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की, उसे उसके मायके पहुंचाया तथा उसके पति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करवाई।”

डीजीपी गौरव यादव ने आगे कहा, “एक अन्य मामले में एक गर्भवती महिला, जिसे उसके पति और परिवार ने छोड़ दिया था, गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराई गई। सांझ राहत केंद्र की टीम ने उसकी काउंसलिंग की और उसे पीजीआई में भर्ती कराया, जहां वह लगभग दो माह तक उपचाराधीन रही। उपचार के दौरान उसका गर्भपात हो गया। इस कठिन समय में टीम ने उसे लगातार भावनात्मक सहयोग और परामर्श प्रदान किया, जिससे वह इस गहरे सदमे से उबर सकी। स्वस्थ होने के बाद टीम ने उसे रोजगार दिलाने में भी सहायता की तथा उसके परिवार से पुनः संपर्क स्थापित कराने के प्रयास किए, जिससे वह सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकी।”

सांझ राहत केंद्रों के अतिरिक्त अनेक अन्य पहलें भी महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण के प्रति पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। ‘जागृति कार्यक्रम’ के तहत पंजाब पुलिस की महिला मित्रों ने पिछले लगभग दो वर्षों के दौरान 12,482 विद्यालयों का दौरा कर 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 11,75,010 बच्चों को जागरूक किया। इस दौरान 76,299 प्राचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों को भी जागरूक किया गया।

महिला सहायता डेस्क पहल के अंतर्गत पिछले पांच वर्षों के दौरान साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल यौन शोषण, बाल विवाह निषेध कानून, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, नशे के विरुद्ध जागरूकता तथा लैंगिक समानता जैसे विषयों पर 69,329 जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।

कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन की स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुरप्रीत कौर देओ ने कहा, “वर्ष 2011 में शुरुआत से ही ‘सांझ’ प्रणाली ने लोगों और पुलिस के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यभर में सांझ समितियों के सशक्त नेटवर्क के माध्यम से युवा सांझ, जागृति तथा स्टूडेंट पुलिस कैडेट जैसी अनेक पहलें सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “सांझ राहत केंद्र एक अनूठी पहल है, जो जरूरतमंद महिलाओं को परामर्श, पुलिस सहायता तथा कानूनी सहयोग प्रदान कर इस क्षेत्र में मौजूद एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करने में सहायता कर रही है।”

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