Type Here to Get Search Results !

भारतीय शेयर बाजार को लेकर Goldman Sachs की चेतावनी, निवेशकों को दी सतर्क रहने की सलाह

 

बिजनेस डेस्कः वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर निवेशकों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। अपनी ताजा रिपोर्ट में कंपनी ने कहा कि नॉर्थ एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का “रिस्क-रिवॉर्ड” समीकरण फिलहाल कम आकर्षक दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बाजार ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि संभावित रिटर्न सीमित नजर आ रहा है। आसान शब्दों में कहें तो बाजार में जोखिम ज्यादा और मुनाफे की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है।

गोल्डमैन सैक्स की निवेशकों को सलाह
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी वैश्विक अनिश्चितताओं और कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर निवेशकों की चिंता भारतीय शेयरों की तेजी को सीमित कर सकती है। इसी वजह से गोल्डमैन सैक्स ने निवेशकों को ऐसे शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी है जिनमें विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कम हो। उनका मानना है कि जब विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटेगा, तब ऐसे शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) फिलहाल भारतीय बाजार में आक्रामक वापसी के मूड में नहीं दिख रहे हैं। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 22 अरब डॉलर की बिकवाली की है। यह पिछले ढाई दशकों में किसी एक वर्ष में हुई सबसे बड़ी बिकवाली से भी अधिक है। इससे पहले 2025 में लगभग 19 अरब डॉलर का रिकॉर्ड आउटफ्लो दर्ज किया गया था।

गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि कंपनियों की कमाई के अनुमानों में संभावित कटौती भी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बड़ी बिकवाली का अधिकांश हिस्सा पहले ही हो चुका है लेकिन कमाई में सुधार के स्पष्ट संकेत मिलने तक विदेशी निवेशक सतर्क रुख बनाए रख सकते हैं।

 

इन सेक्टर से विदेशी निवेश घटा
मार्च तिमाही के दौरान बैंकिंग, रियल एस्टेट, कंज्यूमर-रिटेल और सर्विस सेक्टर में विदेशी हिस्सेदारी में सबसे तेज गिरावट देखी गई। खासतौर पर लार्ज-कैप कंपनियों में विदेशी स्वामित्व एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय बाजार से 4 से 5 अरब डॉलर की अतिरिक्त बिकवाली और हो सकती है।

हालांकि कुछ सेक्टर्स में विदेशी निवेश बढ़ा भी है। मेटल्स, माइनिंग, यूटिलिटीज और इंडस्ट्रियल सेक्टर में निवेशकों की रुचि देखने को मिली। इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 11.4 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.